राष्ट्रपिता के हत्यारे की चेली समझ पापी प्रज्ञा को कोस रहा हिंदुस्तान!

जनसम्पर्क – life

क्या फिर शर्मिंदा हुआ भोपाल का मतदाता!!!

लोकतंत्र के मंदिर में शैतान की पैरवी का पाठ !!!!
Anam Ibrahim
7771851163

अगर देशभगति का जज़्बा इंसान को जज़्बाती बना दे तो दिल में वतन पर जान कुर्बान करने की तमन्ना पैदा हो जाती है और उस वक़्त कपकपाते हुए लबों से निकलता हर लफ़्ज़ शहीदों को सहादत बख्शते हुए उनका ज़िक्र आने पर भी सम्मान-आदर मान-मर्यादा को हर हाल में महत्व दे बरकरार रखता है लेकिन आज़ाद-ए-हिन्द के जन्मदाताओ की अव्वल सफ़ में खड़े राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी का नाम आते ही हर भारतीयों के दिलो में सम्मान की शमा जल जाती है और साथ ही हर घर का चराग़ भी क्योंकि हर मुद्रा पर गांधी है, हर भारतीय के मन मे भी छुपा कहीं ना कहीं एक गांधी है,

……

सदन की पवित्रता कलंकित हुई या भारतीयों के दिल टूटे लेकिन हर हाल में कर्म के जले नफ़रत के सौदागर आतंकवादियों के हिमायतियों को देशवासी कोसते हुए हाथो की उंगलिया को चटकाते आएं हैं। ठीक उसी तरह जैसे दोबारा राष्ट्रपिता बापू श्री स्वर्गीय सत्य वादी मोहनदास करमचंद गांघी जी के हत्यारे आतंकवादी नाथू की चेली ने लोकतंत्र के मंदिर सदन के बीच दोबारा उस वक़्त खुले तौर पर हत्यारे आतंकी नाथू को देशभक्त करार दिया जिस समय विपक्षियों के ख़ेमे एक सियासी सिपाही डीएमके के सांसद ए. राजा अमेंडमेंट बिल पर आतंकी गोड़से के एक बयान का हवाला दे रहे थे कि हत्यारे गोडसे ने महात्मा गांधी को क्यों मारा। अभी ए. राजा की बात मुक़म्मल भी नही हो पाई थी कि बीच मे प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लुकमा देते हुए कहा की गोडसे देशभक्त थे। आप उनका उदहारण नही दे सकते, गौरतलब है कि प्रज्ञा ने भोपाल चुनाव जीतने के बाद बापु के हत्यारे गोड़से की तारीफ़ में क़सीदे पढ़े थे हालांकि उस वक़्त विपक्ष के साथ खुद मोदी भी प्रज्ञा के बयान पर खुले तौर पर मीडिया के दरमियाँ नाराजगी दर्ज़ करवा चुके थे परन्तु दोबारा प्रज्ञा का लोकतंत्र के मंदिर में महात्मा गांधी के क़ातिल को देशभक्त होने का हवाला देना इस बात को साफ़ करता है कि दोबारा प्रज्ञा वो गलती अपनी मर्ज़ी से नही कर सकती जिस ग़लती की वजह से उसे अपने कहे पर माफ़ी मांगनी पड़ी थी, क्या प्रज्ञा को भाजपा की तरफ़ से सह मिली थी? क्या प्रज्ञा को गोडसे का मुद्दा गरमाने के लिए मोदी ने इस्तेमाल किया? अगर ऐसा नही है तो मोदी के ख़फ़ा होने का ख़ौफ़ प्रज्ञा को बोलने से पहले क्यों नही सताया? जो भी हो, लेकिन विपक्ष प्रज्ञा की शुरुआती सियासत से ही आतंकवादी मानता है वजह मालेगांव बमकाण्ड व हत्या जैसे मामलों में भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर पूर्व में लम्बे समय तक कैदखाने की सलाख़ों के पीछे जा कर हवा भी खा चुकी है, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद प्रज्ञा ठाकुर जेल की चार दिवारी से रिहा भी हो गई व अपनी धुंदली पड़ गई साध्वी वाली छवि को प्रज्ञा ने साफ़ भी कर लिया था बस बाक़ी थे तो वो अतीत के दाग़ जो मिट नही सके,अगर एक लोकतंत्र के मंदिर का पुजारी राष्ट्रपिता के क़ातिल को देशभगत मानता है तो फिर उसे याक़ूब मैमन, अफ़ज़ल गुरु को भी शहीद देशभगत मानना पड़ेगा। शर्म आती हैं जब देशभक्ति कि ठेकेदारी का दावा करने वाले ही राष्ट्रपिता का अपमान करें। खैर, अगर प्रज्ञा लोकसभा चुनाव के पहले राष्ट्र विरोधी ज़हर उगल देती तो शायद भोपाल की जनता जमानत जप्त करवा देती लेकिन आज जब पूरा मुल्क़ प्रज्ञा पर थू-थू कर रहा है तो वहीं भोपाल की जनता शर्मिंदा होकर अपने मत के ग़लत इस्तेमाल पर अफ़सोस ज़ाहिर कर रही ह।

जल्द पढ़िए जनसम्पर्क -life में और जानिए सियासत की आड़ में कट्टरवाद के पनपते घिनोने चेहरो की हक़ीकत

Related posts