भोपाल में नर्मदा बचाओ समिति का धरना प्रदर्शन, सरकार पर लगाए वादाखिलाफी के आरोप

भोपाल। गुजरात में सरदार सरोवर बांध के निर्माण की शुरुआत के साथ ही नर्मदा बचाव आंदोलन शुरू हुआ। तीन राज्यों को प्रभावित करने वाले बांध से होने वाले असर को लेकर शुरुआत से ही विरोध के स्वर उठने लगे थे। नर्मदा पर छोटे-बड़े डेम बने तो उतने ही विस्थापितों की आवाज बुलंद हुई। नर्मदा बचाओ समिति की अध्यक्ष मेघा पाटकर ने हमेशा से विस्थापितों के लिए आवाज बुलंद की है। मेघा एक बार फिर विस्थापितों के हक के लिए राजधानी भोपाल पहुंच गई। नर्मदा भवन के बाहर मेघा पाटकर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। मेघा पाटकर ने कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि। अब तक मुआवजा नहीं मिला है और न ही विस्थापितों को जमीन दी गई है। सरदार सरोवर बांध को 122 मीटर से 139 मीटर तक भर दिया गया है…जिससे कई गांव डूब गए हैं…डूब में आने से कई एकड़ फसल बर्बाद हो गई है।

वहीं पर्वू विधायक डॉक्टर सुनीलम ने कहा कि हम लोग संवाद करने के लिए आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के कारण बांध को ज्यादा भरा गया है, जिससे गांव टापू मे तब्दील हो गए। कांग्रेस सरकार के मंत्री उसी क्षेत्र से आते हैं, हमे लगा कि हमारी बात सुनेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमारी मांग है कि सरकार अपने वायदे को पूरा करे। हमारी अलग से कोई मांग नहीं है, अगर मांग पूरी नहीं हुई तो धरने पर बैठेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कमलनाथ सरकार क्यों गुजरात और केंद्र का खुलकर विरोध नहीं कर रही।

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