त्रिमूर्ति बन, कलेक्टर, DIG, निगम कमिश्नर ने शांति के खुटे ठोक शहर में रचा इतिहास!!

Anam Ibrahim
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भोपालः 72 घण्टे रात दिन शहर के चप्पे-चप्पे पर नज़र रखते हुए गली मौहल्ले की ख़ाक छानते नज़र आए तीन अफ़सरो की तारीफ़ों में जितने क़सीदे पढ़े जाएं कम है, अचानक आए अयोध्या के फ़ैसले की तारीख़ से जहां अन्य जिलों में सुरक्षा व्यवस्थाय कुछ हद तक चरमराने की कगार पर आ खडी हुई तो वहीं भोपाल DIG इरशाद वली,कलेक्टर तरुण पिथोड़े व निगम कमिश्नर विजय दत्ता की सूझबूझ हिकमतअमली ने शहरभर में शांति के सरिए गाड़ दिए, 72 घण्टे हरचंद क़वायद कर शहर को सुरक्षा का लिहाफ़ ओढ़ाए रखने में सफ़लता अर्जित की, शहर के हर नुक्क्ड़ चौराहें और गलियों की शान्ति इन तीनो अफ़सरों की निगेहबानी की गवाही दे रही है। सड़को की धूल-मट्टी उड़ते गर्दोगुबार आला अफ़सरों के कपड़ों और चेहरों पर बतौर सबूत दे रहे थे कि किस हद तक रात दिन मेहनतकशी कर इन तीनो ने शहर को लोकशांति का अमलीजामा पहनाया है जैसे ही नफ़रत की हवाओं में उड़ते अफ़वाहों के बाज़ शहर की तरफ़ अमन भाईचारे के कमज़ोर चूज़ों को दबोचने आते थे वैसे ही पुलिसिया बल मुर्गी की मानिंद माँ का क़िरदार निभा पंख फैला शहर को सुरक्षा के साए समेत लेती थी। तीनो अफ़सरो के साथ-साथ रातदिन शहर भर में तैनात हर एक ख़ाकीधारियों कि भूमिका भी क़ाबिले क़द्र है जिला प्रसासन के अमले व निगम दफ़्तर के मुलाज़िमों की मेहनत को भी मेरा सलाम, शांति क़ायम करने वाले सुरक्षा समितियो के जवान बुज़ुर्गो को भी सलाम, ख़ासतौर पर शहर की आवाम को भी सलाम जिन्होंने इस नाज़ुक घड़ी में प्रशासनिक व्यवस्थाओ को सहयोग प्रदान किया। वास्तविकता में भोपाल की जनता प्रदेश भर में अमनपसन्दों में अव्वल है जो समझदारी के शिखर पर खड़े हो तमाम देश दुनिया के लिए भाईचारे का उदहारण साबित हुई है। दोस्तो तलवारों की धारो में वो बात कहां गोलियों की बौछारों में वो दम कहां जो मोहब्बत के फूल खिलाने में है जो एक दूसरे को गले लगाने में है, आईये एक दूसरे के दर्द की दवा बन जाए हाथो में एक दूसरे के हाथ दें। अपना हो पराया सभी का साथ दे।

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