गरीबी से जंग हार गया परिवार, सरकार और सभ्य समाज पर तमाचा

सागर। गरीबी और बदनसीबी से जंग लड़ते—लड़ते हार चुके एक परिवार ने मौत को गले लगाना ही बेहतर समझा। जान देने की गरज से परिवार के चार लोगों ने जहर निगल लिया जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई…जी हां सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र में बमोरी रंगवा गांव ऐसी मौत का साक्षी बना जो शासन, प्रशासन और सभ्य समाज दोनों के मुंह पर तमाचा है। गरीबी और बेबसी ने इस परिवार पर ऐसा कहर डाला कि भूख मिटाने के लिए जहर खा लिया और इलाज के अभाव में जिंदगी चली गयी। दर्शक बनकर देखता रहा ये समाज और परिवार के तीन लोगों ने आंखे मूंद लीं।

जानकारी के अनुसार, सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र में बमोरी रंगवा गांव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। गांव के एक परिवार के 4 लोगों ने बुधवार रात को जहरीला पदार्थ खा लिया। जहर खाने से मां सहित दो बच्चों की मौत हो गई। पति का गम्भीर अवस्था मे जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें घर के मुखिया ने आत्म हत्या का कारण जीवन यापन न कर पाने की वजह बताई है।

दरअसल मनोज पटेल अपनी पत्नी पूनम पटेल दो बच्चियों सोनम (10) और जिया (6 माह) के साथ रहता था। कुछ साल से मनोज बेरोजगार चल रहा था…परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी…खाने तक के लाले पड़ रहे थे। उसने इस बात की चर्चा उसने अपने परिचितों से भी की थी। लेकिन किसी ने कोई मदद का हाथ आगे नहीं बढ़ाया। इसी वजह से वो तनाव में था। जब उसे कोई और रास्ता नहीं दिखा तो उसने कल बुधवार रात को अपने परिवार सहित जहरीला पदार्थ खा लिया। जब बहुत देर तक घर से कोई बाहर नहीं निकला तो ग्रामीणों ने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई हरकत न होते देखकर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। तब इस घटना का पता चला।

वैसे तो गरीबी मिटाने के लिए बहुत सी योजनाएं चलाई गईं, लेकिन इनका असर जमीनी स्तर पर कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। इंदिरा गांधी से लेकर मोदी सरकार तक ने देश में गरीबी हटाओ का नारा दिया, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह नारा सिर्फ नारा ही बनकर रह गया।

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