अधूरे लिबाज़ में आधा नंगा बदन लिए फ़रियादी बन पहुचे पढ़े -लिखे गवार राजधानी!!

Anam Ibrahim
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शिक्षा के विपक्षी बीजेपी ख़ेमे का सियासी मान मर्यादा लांगने वाला लश्कर , आख़िर खेल मंत्री जीतू पटवारी को घेरने में क्यों असफ़ल रहा???

जनसम्पर्क – life

नाम,अतिथि विद्वान संघर्स समिति,काम,ज़बरन सड़को पर नंगा हो बेशर्म समिति!!!

भोपालः शिक्षक मतलब समाज का पढ़ा-लिखा वो तबका कहलाता है जिसमे आदर सम्मान मान मर्यादा संस्कार का ज्ञान कूट कूट कर भरा हो,परन्तु शिक्षकों का चोला ओढ़कर शैतानों की गैंग बदन से आधी नंगी और विचारों से पूरी नंगी होकर भोपाल क्यों पहुँची ? जिनके करतूतों ने प्रदेशभर में तमाम शिक्षा के मंदिरों के पुजारी मतलब शिक्षकों के सर शर्म से झुका दिए, मामला तनिक सियासी है जिसे हज़म करने के लिए हाजमोला की ज़रूरत पड़ सकती है ख़ासकर उनको जिनके लिवर शिक्षा संस्थान से जुड़े हुए है, दरअसल मध्यप्रदेश में जो CBSC, ICSC व अन्य शासकीय केंद्रीय व प्रदेश बोर्ड से जुड़े विद्यालयों में बतौर guest Faculty के रोज़नामचे में नोकरी कर रहे शिक्षकों के नाम पर दो-चार दर्ज़न का काफ़िला योजनाबद्ध तरीक़े से हुक़ूमत के खेल मंत्री जीतू पटवारी के चुनाव क्षेत्र से सियासी इशारे पर इंदौर से भोपाल रवाना हो नाथ सरकार को घेरने निकला था,लेकिन आज भोपाल पहुचते ही वो सियासी शिक्षा का लश्कर खुद ही घिर गया,

कैसे शुरू हुई शिक्षा की आड़ सियासी शैतानी ?

4 अक्टूबर को जो चंद नुमाइंदों का काफ़िला, नाथ सरकार को बदनाम करने पैदल इंदौर के सड़किया रास्तो से भोपाल के लिए रवाना हुआ था, जैसे ही उसने देवास,सोनकच्छ टोल टैक्स के पास पड़ाव डाला तो वो संख्या में थोड़े से ज़्यादा हो गया, लेकिन जब उसी क़ाफ़िले ने आसटा
सीहोर पार करते हुए सफ़र तय किया तो उस वक़्त तक क़ाफ़िले से जुड़ते जुड़ते लोगो की तादात लश्कर का रूप धारण कर चुकी थी,लिहाज़ा शुत्रो के सुराग़ से फैली सनसनी चीख चीख कर चिरक रही थी कि हर पड़ाव पर इस हुज़ूम को मज़बूती देने बीजेपी के स्थानीय नेता व कार्यकर्ता साथ होते चले गए या अपने क़रीबियों को इस विरोधी दस्ते का मेम्बर बनाते चले गए,बहरहाल जब ये बेलिबास बेशर्मो की गैंग भोपाल शहर के अंदर दाख़िल हुई तो सड़कों पर चल रही महिलाएं शर्म से पनिपानी हो गई,इधर नगें क़ाफिले को देख , मामले से भलीभांति वाक़ीब हो चुकी भोपाल पुलिस ने इस क़ाफ़िले को छेड़ा भी नही, ना ही उनके नंगे हल्ले पर एहतराज दर्ज़ करवाया,क्योंकि समाज के भीतर भभूकता की गीली लाड़ में पनपती कई ज़ुबाने नंगी है जो अपने लफ़्ज़ों पर तन्हाई में तो क्या बल्कि सर्वेजनिक तौर पर भी लगाम नही रख सकती, फिर तो ये शिक्षकों के नाम पर नगें हो सड़कों पर मटरगश्ती का सियासी तमाशा था।

विधायक कुणाल चौधरी व अन्य दो विधायक,पहले दिन ही शिक्षकों से मिलने पहुचे!!!

शिवराज सरकार के दौर में अगर ये काफ़िला नंगा होकर भोपाल आता तो पुलिस के लठ से सुजफुल कर हरापिला हो जाता,क्योंकि प्रदेश के शिक्षक हो विकलांग हो हर धरने को उस दौर में लठ के जोर से ही रोका जाता था, हफ़्तो गुज़र जाने के बाद भी शिवराज सरकार ठस से मस नही होती थी लेकिन यहां तो पहले दिन ही
नाथ सरकार के विधायक मांगे सुनने पहोच गए, कुणाल चौधरी ने जनसम्पर्क – Life को बताया कि
अफवाह फैलाई गई थी की daily wages शिक्षको को सरकार हटाएगी लेकिन सरकार ऐसा कुछ नही कर रही हैं। मांग को पहले दिन ही खत्म कर दिया गया क्योंकि ये सरकार किसी के पेट पर लात नही मारेगी। बस संभाग में ही 12 लोगो का तबादला किया गया है,। खेर सरकार के सदस्यों की बात मानकर हज़ारो की भीड़ वापस चले गई परन्तु विपक्ष के सियासी इशारे पर 2सौ लोगो का हुजूम महिलाओ को ढाल बना नीलम पार्क में ही डटा रहा,लेकिन उन अनाड़ी नंगी गैंग को थाना जहांगीराबाद के टीआई का रिकॉर्ड नही मालूम कि लॉ एंड ऑर्डर को बरकरार रखने के लिए वीरेंद्र चौहान मंत्री के बंगले के अंदर भी घुस के मारते हैं फिर तो ये नीलम पार्क है,
आगे की कारगुज़ारी प्रदेश की हकीकत के आगामी अंक में पढ़े

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